नई दिल्ली । माइग्रेन ग्रस्त लोगों को अक्सर यह दर्द कान व आंख के पीछे अथवा कनपटी में होता है। वैसे यह दर्द सिर के किसी भी भाग में हो सकता है। इससे कुछ लोगों के देखने की क्षमता भी कम हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है, माइग्रेन ने लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को अपना शिकार बना रखा है। हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो इससे ग्रसित न हो। फिर भी माइग्रेन को लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं और न ही इसका उचित उपचार कराते हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है और बहुत कम ही महिलाएं इसका उपचार कराती हैं। ज्यादातर लोग इसे एक सामान्य बीमारी समझकर दर्दनाशक दवाएं खा लेते हैं और बिना उचित इलाज के रहते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि यह एक आनुवांशिक बीमारी है, जो खानपान, वातावरण में बदलाव, बढ़ते तनाव या कभी-कभी बहुत अधिक सोने से भी हो सकता है। इसकी शुरुआत बचपन, किशोरावस्था या वयस्क होने पर कभी भी हो सकती है। कभी-कभी उल्टी, जी मिचलाना आदि की शिकायत भी हो सकती है। अगर उपचार न हो तो यह दर्द 4-5 घंटों तक रह सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, बायोफीडबैक, योग, एक्यूप्रेशर और नियमित व्यायाम आदि से माइग्रेन के दौरे को घटाने में मदद मिलती है।  माइग्रेन से बचने के लिए सिरदर्द उत्पन्न करने वाले कारणों से बचना चाहिए, जैसे ऊंची आवाज में गाने सुनना, तनावग्रस्त रहना आदि।  दर्दनिवारक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। संतुलित दिनचर्या का पालन करना चाहिए व  समय पर सोना व जगना चाहिए। इसके अलावा  नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए तथा  बहुत ज्यादा देर तक भूखे नहीं रहना चाहिए। माइग्रेन सामान्य तौर पर होने वाला एक विशिष्ट प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन से नियमित तौर पर सिरदर्द के दौरे पड़ते हैं।