बेंगलुरु । भारत के बीयर बाजार में क्राफ्ट बीयर को लेकर बढ़ते क्रेज ने इसकी मांग भी बढ़ा दी है। इस बढ़ती मांग को भुनाने के लिए करीब आधा दर्जन माइक्रो ब्रुवरीज, बोतलबंद बीयर ब्रांड बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। अभी तक इस बाजार में मोटे तौर पर हाइनेकेन और एबी इनबेव की ओर से बड़े पैमाने पर प्रोड्यूस किए जाने वाले ब्रांडों की वजह से काफी ग्रोथ देखने को मिली है। इन माइक्रोब्रुवरीज के क्राफ्ट बीयर को शुरुआत में गोवा, बेंगलुरु, पुणे और गुरुग्राम जैसे मार्केट्स के रिटेल स्टोरों पर लॉन्च किया जाएगा। क्राफ्ट बीयर को मूल रूप से ब्रुपब्स में कंजम्पशन के इरादे से छोटे बैचों में बनाया जाता है।
भारत में अभी तक बीरा, व्हाइट आऊल और सिंबा जैसे क्राफ्ट बीयर ब्रांड्स मौजूद हैं, जबकि पिछले एक दशक में देश में करीब 170 माइक्रो ब्रुवरीज खुली हैं। बेंगलुरु स्थित ब्रुपब विंडमिल्स क्राफ्टवर्क्स के को-फाउंडर अजय नागराजन ने बताया, 'कर्नाटक सरकार ब्रुपब को खुद की बनाई बीयर को बेचने की इजाजत नहीं देती है। हमें एक दिन में 1,000 लीटर बीयर बनाने की ही इजाजत है।' नागराजन ने बताया कि उन्होंने गोवा में 2000 लीटर की उत्पादन क्षमता वाली ब्रुवरी खरीदी है। वह क्राफ्ट बीयर के कैन का प्रॉडक्शन शुरू करने वाले हैं। कंपनी अपने इस ब्रांड को मुंबई, पुणे, गोवा और हैदराबाद के मार्केट में बेचेगी। बेंगलुरु के सबसे पहले ब्रुपब्स में से एक टॉइट रोजाना करीब 1,500 लीटर क्राफ्ट बीयर बनाती है। उसने बताया कि वह पैकेज्ड बीयर के 4 लॉन्च वेरिएंट लॉन्च करने की तैयारी कर रही है और इसके लिए वह शहर के बाहर 4 एकड़ में एक प्रॉडक्शन ब्रुवरी तैयार कर रही है।
देश के बीयर मार्केट में क्राफ्ट बीयर का हिस्सा करीब 2-3 फीसदी  है। हालांकि युवाओं के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कई युवा तो अब मल्टीनेशनल कंपनियों की ओर से बेचे जाने वाले 'स्ट्रॉन्ग' वर्जन की जगह क्राफ्ट बीयर को ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि उनके मुताबिक यह कहीं ज्यादा विश्वसनीय, प्रीमियम और बेहतर फ्लेवर वाला है। क्राफ्ट ब्रुवर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीबीएआई) के ऑफिसर और आरबॉर ब्रुइंग कंपनी के एमडी गौरव सिक्का ने बताया, 'ब्रुपब्स से अच्छा अनुभव मिला।' सिक्का ने एक साल पहले गोवा में क्राफ्ट बीयर के तीन वेरिएंट कैन-मार्केट में लॉन्च कर इस ट्रेंड की शुरुआत की थी। अगली तिमाही में वे दो और वेरिएंट लॉन्च करने वाले हैं और अगले 4 महीनों में वे बेंगलुरु मार्केट में भी एंट्री की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर क्राफ्ट बीयर को बनाना और उसे बेचना आसान नहीं है। लाइसेंस और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी समस्याओं के अलावा ब्रुपब्स को कोल्ड चेन सप्लाई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, इन बीयर की जल्द एक्सपायरी डेट और बीयर मार्केट में मौजूद एमएनसी के मुकाबले काफी छोटे बजट जैसी चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है।