हरियाणा रोडवेज में वर्ष 2016 से अनुबंध आधार पर काम कर रहे 365 चालकों की छुट्टी होगी। परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के आदेश पर शुक्रवार को रोडवेज महाप्रबंधकों ने कई जिलों में आनन-फानन में इन कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के पत्र थमा दिए। सोनीपत में 36 और नारनौल में 11 कर्मचारी निकाले गए हैं। वहीं, विभाग की कार्रवाई से भड़की रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी ने कच्चे कर्मचारियों को हटाने का आदेश वापस नहीं होने की स्थिति में आंदोलन छेड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

पिछले साल मई में भी परिवहन विभाग ने आउटसोर्सिंग पॉलिसी-2 के तहत लगे कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया था, लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद दिसंबर में फिर से इन्हें निकालने के पत्र जारी किए गए, लेकिन 54 कर्मचारी हाई कोर्ट में चले गए।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश पर तब परिवहन सचिव ने इन कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया रोक दी थी। अब एक बार फिर सभी डिपुओं में स्टाफ पूरा बताते हुए सभी कच्चे कर्मचारियों को बाहर निकालने का आदेश दिया गया। हालांकि हाई कोर्ट में केस लड़ रहे कर्मचारियों को अभी नहीं छेड़ा जाएगा।

आंदोलन के लिए उकसा रहे अफसर : किरमारा

कच्चे कर्मचारियों को निकालने के विरोध में रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी के वरिष्ठ नेता दलबीर किरमारा ने कहा कि परिवहन अधिकारी उन्हें फिर से आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं।

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को निकालने का आदेश किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग के अफसर हर दिन नए तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं। आमजन को परेशान करने वाले फैसलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आदेश वापस नहीं होने पर जल्द ही तालमेल कमेटी की बैठक बुलाकर आंदोलन की घोषणा की जाएगी।