सरथाणा की तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग में आग लगने के मामले में कई लापरवाहियां सामने आई हैं। यहां चलाई जा रही कोचिंग क्लास की छत सिर्फ 5 फीट ऊंची थी। कुर्सी रखने की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए छात्र-छात्राओं को टायरों पर बैठाया जाता था। कमरे में बड़ी मात्रा में फ्लैक्स भी रखे थे, जिनकी वजह से आग तेजी से फैली। मुख्य सचिव जेएन सिंह ने रविवार को शुरुआती जांच के बाद तथ्यों की जानकारी दी। प्रशासन ने भी माना है कि दमकल पहुंचने में देरी हुई थी। इस हादसे में 22 छात्र-छात्राओं और एक टीचर की मौत हो गई थी।

 

सिंह ने कहा, ‘‘उच्च क्षमता वाले फायर टेंडरों को मौके पर पहुंचने में समय लगा, क्योंकि वे करीब 45 मिनट की दूरी पर तैनात थे।’’ इस घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजरात सरकार को नोटिस भेजा है। 

 

सूरत में ही थे बिल्डर, नाश्ते की दुकान पर गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने दोनों बिल्डर जिग्नेश पाघदाड और हर्षुल बेकरिया को रविवार को गिरफ्तार कर लिया। उस वक्त वे एक दुकान पर नाश्ता कर रहे थे। जिग्नेश तक्षशिला आर्केड का मुख्य बिल्डर है, जबकि हर्षुल उसका पार्टनर था। इस कॉम्प्लेक्स में कुछ और पार्टनर हैं, जिनकी जानकारी जुटाई जा रही है।


कोर्ट ने कहा- पर्दे के पीछे छिपे लोग बच न पाएं
मामले में रविवार को कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया। क्लास संचालक भार्गव बूटाणी को दो दिन की रिमांड पर सौंपते हुए सेशन कोर्ट ने जांच अधिकारी क्राइम ब्रांच के एसीपी आरआर सरवैया से कहा कि ऐसे केसों में देखने को मिलता है कि पर्दे के पीछे जो लोग होते हैं वे बच जाते हैं। इसलिए बिना किसी डर और संकोच के मामले की जांच करें। आरोपी भार्गव बूटाणी के लिए क्राइम ब्रांच ने 10 दिन का रिमांड मांगा था। उधर, मनपा कमिश्नर ने उधना जोन के डिप्टी इंजीनियर (सिविल) विणु के परमार को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, पूरी एफआईआर में जो आरोपी बताए गए हैं, उनमें पालिका या दक्षिण गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (डीजीवीसीएल) के एक भी अधिकारी का नाम नहीं है।  

 

सात की हालत अब भी गंभीर 

इस घटना में घायल हुए सात लागों की हालत बेहद गंभीर है। हादसा 24 मई की दोपहर 3:40 बजे शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ था। हादसे के वक्त 60 छात्र-छात्राएं दूसरी और तीसरी मंजिल पर चलने वाली दो आर्ट-हॉबीज क्लासेज में थे। आग लगने से 13 बच्चों ने दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगाई। इनमें से तीन की कूदने से मौत हुई थी।