जबलपुर। १५ अप्रैल २०१९ को हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किया था कि याचिकाकर्ता डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव द्वारा पार्षदों के चुनाव खर्च की सीमायें तय करने के सिलसिले में प्रस्तुत आवेदन पर निर्णय लें। उल्लेखनीय है कि नागरिक उपभोकता मार्गदर्शक मंच ने १८ फरवरी २०१९ को केन्द्र तथा राज्य निर्वाचन आयोग तथा प्रदेश सरकार के विधि मंत्रालय साथ ही शहरी विकास मंत्रालय को आवेदन भेजा था कि अब नगर निगम तथा पालिकाओं के महापौर एवं अध्यक्ष के चुनाव प्रत्याशियों की निर्वाचन खर्च की सीमायें तय हैं तब पार्षद पद के प्रत्याशियों की निर्वाचन खर्च की सीमायें तय क्यों नहीं हैं..? किन्तु तब इस अवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तब याचिकाकर्ताओं डॉ. पी.जी. नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने म.प्र. हाईकोट्र में इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की थी। 
बाद में १ मई २०१९ को विधि विभाग से जानकारी भेजी गई कि ‘‘इस प्रकरण में प्रशासनिक विभाग से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, प्रस्ताव प्राप्त होने पर कार्यवाही की जा सकेगी।‘‘
चार महीनों से कोई कार्यवाही नहीं .......
याचिकाकर्ता डॉ. पी.जी. नाजपांंडे तथा रजत भार्गव ने केन्द्रीय तथा राज्य चुनाव आयोग एवं प्रदेश सरकार को आज पुनः आवेदन भेजा तथा बताया कि उनके द्वारा प्रस्तुत प्रथम आवेदन को चार माह हो गये, दूसरे आवेदन को डेढ़ माह हो गये तथा तीसरे आवेदन को २० दिन हो गये फिर भी अभी तक उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। विधि विभाग से भेजी गई जानकारी को भी ३० दिन पूरे हो गये हैं और अब २५ मई को चुनाव आचार संहिता भी समाप्त हो गई है। 
प्रदेश में कुछ ही माहों के बाद नगर निगम तथा नगर पालिकाओं के चुनाव की घोषणा होने वाली है। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट के आदेशानुसार तत्काल कार्यवाही की जाये अन्यथा याचिकाकर्ताओं को पुनः हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ेगा।