रायपुर। रायपुर जिले के लखौली ग्राम के निकट रीवा ग्राम में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा आज पुरावशेषों के अन्वेषण के लिए उत्खनन कार्य प्रारंभ किया गया। विभाग के संचालक अनिल साहू ने प्राचीन राजिम-सिरपुर पथ पर स्थित इस स्थल पर पारंपरिक रूप से श्रीफल अर्पित कर कार्य का शुभारंभ किया। 
श्री साहू ने बताया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण के बाद इस स्थल का चयन किया गया है। यहां प्रथम-द्वितीय सदी के अवशेष मिलने की व्यापक संभावनाएं हैं। रीवा ग्राम में मिट्टी के प्रकार तथा परिखा युक्त प्राचीन गढ़ तथा बसाहट के विलुप्त अवशेष भी बचे हुए हैं। यह स्थल लगभग 6वीं सदी ईसवी में महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथा व्यापारिक स्थल रहा होगा। रीवा उत्खनन निदेशक पद्मश्री सम्मान प्राप्त डॉ. अरूण कुमार शर्मा के निर्देशन में विभाग के श्री वृषोत्तम साहू के द्वारा इस स्थल का सर्वेक्षण के बाद चयन किया गया है। श्री शर्मा के अनुसार यहां मौर्य काल में बसाहट आरंभ हो चुका था तथा सोमवंशी शासकों के काल में यहां बिहार तथा मंदिरों का निर्माण कराया गया होगा। पुरातत्व विभाग के उप संचालक जे.आर. भगत ने स्थल की प्राचीनता के संबंध में ईंटों के जमाव के आधार पर अभिमत दिया है कि एक सप्ताह में 7वीं सदी के अवशेष स्पष्ट रूप से परिलक्षित होने की संभावना है। रीवा में चल रहे उत्खनन कार्य से छत्तीसगढ़ में प्राचीन व्यापारिक पथ और प्रशासनिक इकाईयों का प्रमाण उपलब्ध होगा।