जबलपुर। 6 जून को प्रदेश में बिजली उत्पादन 1621 मेगावट था, लेकिन इसका 3 कम्पनियों के माध्यम से वितरण हुआ। स्पष्ट है कि वर्तमान में प्रत्येक वितरण कम्पनी औसतन केवल ३ हजार मेगावाट बिजली का ही वितरण कर रही है और इसके लिये प्रत्येक कम्पनी में भारी तादाद में कर्मचारी पदस्थ है। 
इसी के उल्टी स्थिति महाराष्ट्र में है, जहां पर २२ हजार बिजली वितरित की जा रही है और वह भी मात्र एक ही वितरण कम्पनी के माध्यम से। महाराष्ट्र में मात्र एक ही वितरण कम्पनी गठित की गई है। 
ऐसे में प्रदेश में ३ विद्युत वितरण कम्पनियों क्यों होना चाहिये..? अतः तत्काल कार्यवाही करें इस आशय का पत्र मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजा। 
वितरण कम्पनियों का विखण्डन  ........
उपभोक्ता मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि वर्ष २००५ में जबलपुर में स्थापित वितरण कम्पनी का विखण्डन राजनीतिक कारणों से कर ३ विद्युत वितरण कम्पनियां बनाई गईं। जबलपुर का महत्व घटाकर जबलपुर के साथ ही ग्वालियर तथा भोपाल में भी कम्पनी के मुख्यालय बनाये गये। 
उपभोक्ता मंच ने जब विद्युत नियामक आयोग के समक्ष मुद्दा उठाया तब आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश साहनी ने अपनी सहमति जताकर शासन से चर्चा करने का आश्वासन दिया किन्तु राजनीतिक दवाब में यह मुद्दा ठण्डा पड़ गया। 
विद्युत अधिनियम में प्रावधान नहीं ...........
डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि विद्युत अधिनियम २०३ में वितरण कम्पनी का विखण्डन करने का प्रावधान नहीं है, लेकिन जबलपुर की राजनीतिक कमजोरी के कारण वर्ष २००५ से ही विद्युत राजधानी का हब जबलपुर से धीरे-धीरे छीना गया। 
वर्तमान सरकार से उम्मीद .......
उपभोक्ता मंच के रजत भार्गव, अनिल पचौरी, डॉ. एम.ए. खान, डॉ. एम.एल.व्ही. राव तथा राममिलन शर्मा ने बताया कि वर्तमान सरकार से उम्मीद है कि पूर्व की सरकार का निर्णय बदले तथा प्रदेश की ३ वितरण कम्पनियों का एक में विलय हो तथा जबलपुर में ही उसका मुख्यालय हो।