अभी तक डायबिटीज (मधुमेह) का कोई स्थायी इलाज नही आया है। पिछले तीन साल से वैज्ञानिक डायबिटीज के स्थायी इलाज की खोज में लगे हुए है। इसी बीच वैज्ञानिकों ने जीन थेरेपी के जरिए चूहों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए स्किन ट्रांसप्लांट का इस्तेमाल किया है। शोधकर्ताओं ने मौजूदा इम्यून सिस्टम के साथ चूहों से चूहों का स्किन ट्रांसप्लांट का मॉडल तैयार किया है। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शाओयांग वू का मानना है कि चूहों में जीन थेरेपी सुरक्षित और स्थिर होने की संभावना है और उन्हें उम्मीद है कि इंसानों पर भी ये थेरेपी ये सफल होगी। 
शोधकर्ताओं ने सीआरआईएसपीआर आधारित टेक्नॉलोजी से जन्मे एक चूहे के स्किन स्टेम सेल्स में बदलाव किया ताकि सेल्स पेप्टाइड को छुपा सके जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। चूहे में सेल्स ट्रांसप्लांट करने से इंसुलिन स्राव बढ़ता दिखा और हाई-फैट डाइट से बढ़ता वजन कम दिखाई दिया और साथ ही इंसुलिन का लेवल नियंत्रि‍त होते दिखा। 
मधुमेह के रोगियों का रोग प्रतिरोधी सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिसके कारण शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है। मधुमेह उन कोशिकाओं को नष्ट कर देता है जो ब्लड शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी हार्मोन इंसुलिन का निर्माण करती हैं। 
शोधकर्ताओं ने ठीक इसके टीके का इस्तेमाल प्रतिरोधक तंत्र को हमले से बचाने के लिए किया। शोध के दौरान इस टीके को मरीज़ के शरीर की बीटा कोशिकाओं पर हमला करने वाली सफ़ेद रक्त कोशिकाओं पर इस्तेमाल किया गया। मरीजों को तीन महीनों तक हर हफ्ते इंजेक्शन दिए जाने के बाद शरीर में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा कम हो गई। 
मरीज़ों की रक्त जांच से पता चला कि वैक्सीन लेने वाले मरीज़ों के शरीर में बीटा कोशिकाएं सिर्फ़ इंसुलिन के इंजेक्शन लेने वाले मरीज़ों की तुलना में बेहतर काम कर रही थी। हालांकि प्रतिरोधक तंत्र के अन्य हिस्से पहले की तरह ही थे। 
प्रोफेसर लॉरेंस स्टीनमैन ने कहा, 'इसके नतीजों से हम बहुत उत्साहित हैं। इससे पता चलता है कि पूरे प्रतिरोधक तंत्र को नष्ट किए बिना सिर्फ़ बेकार प्रतिरोधक कोशिकाओं को नष्ट करना संभव हो सकेगा।'यह शोध अभी शुरूआती दौर में है। अभी टीके के दूरगामी परिणामों को परखने के लिए बड़ी संख्या में मरीज़ों पर इसके परीक्षण की ज़रूरत है।