आमतौर पर नवजात बच्चे पीलिया की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। अगर शरीर पीला पड़ रहा है तो ये पीलिया का लक्षण हो सकता है। पीलिया को जॉन्डिस भी कहा जाता है। हालांकि, बच्चों में पीलिया होने पर चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर बड़े इस बीमारी की चपेट में आ जाएं तो परेशानी बढ़ जाती है। इसे ठीक होने में भी समय लगता है और उस दौरान परहेज भी करना पड़ता है। 
कब होता है पीलिया 
जब शरीर में रेड ब्लड सेल्स एक तय अंतराल, यानी 120 दिन में टूटते हैं तो बिलिरुबिन नाम का एक बाई-प्रॉडक्ट बनता है। ये पदार्थ पहले, लीवर में जाता है और फिर धीरे-धीरे मल-मूत्र के साथ शरीर से निकल जाता है। लेकिन, अगर किसी कारण से रेड ब्लड सेल्स 120 दिनों से पहले टूट जाते हैं तो लीवर में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसी से पीलिया होता है।
लक्षण
त्वचा का पीला पड़ना
आंखों का सफेद होना
पेशाब का रंग गहरा पीला होना
मल का रंग सामान्य न होना
बुखार
पेट में दर्द
बदन में खुजली
वजन कम होना
अगर इनमें से कोई भी लक्षण परेशान करे तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें और पीलिया का टेस्ट करवाएं।
बचाव
इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है- टीकाकरण।
पीलिया में लीवर पर असर पड़ता है। इससे बचने के लिए खुले में रखे हुए आहार स्ट्रीट फूड और प्रदूषित पानी का सेवन न करें। इसके अलावा ताजा खाना खाएं और उबला हुआ पानी पिएं। बाहर का खाना खाने से परहेज करें। 
पीलिया में रखें विशेष ध्यान 
आमतौर पर नवजात बच्चे पीलिया की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। अगर शरीर पीला पड़ रहा है तो ये पीलिया का लक्षण हो सकता है। पीलिया को जॉन्डिस भी कहा जाता है। हालांकि, बच्चों में पीलिया होने पर चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन अगर बड़े इस बीमारी की चपेट में आ जाएं तो परेशानी बढ़ जाती है। इसे ठीक होने में भी समय लगता है और उस दौरान परहेज भी करना पड़ता है। 
कब होता है पीलिया 
जब शरीर में रेड ब्लड सेल्स एक तय अंतराल, यानी 120 दिन में टूटते हैं तो बिलिरुबिन नाम का एक बाई-प्रॉडक्ट बनता है। ये पदार्थ पहले, लीवर में जाता है और फिर धीरे-धीरे मल-मूत्र के साथ शरीर से निकल जाता है। लेकिन, अगर किसी कारण से रेड ब्लड सेल्स 120 दिनों से पहले टूट जाते हैं तो लीवर में बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। इसी से पीलिया होता है।
लक्षण
त्वचा का पीला पड़ना
आंखों का सफेद होना
पेशाब का रंग गहरा पीला होना
मल का रंग सामान्य न होना
बुखार
पेट में दर्द
बदन में खुजली
वजन कम होना
अगर इनमें से कोई भी लक्षण परेशान करे तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें और पीलिया का टेस्ट करवाएं।
बचाव
इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है- टीकाकरण।
पीलिया में लीवर पर असर पड़ता है। इससे बचने के लिए खुले में रखे हुए आहार स्ट्रीट फूड और प्रदूषित पानी का सेवन न करें। इसके अलावा ताजा खाना खाएं और उबला हुआ पानी पिएं। बाहर का खाना खाने से परहेज करें।