इन्दौर । एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज ही प्रस्तुत बजट में बैंकिंग व्यवस्था को सुधारने तथा आम लोगों को 59 मिनट में लोन देने की घोषणा कर देश में बैंकिंग ढर्रे को सुधारने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर म.प्र. ग्रामीण बैंक के इंदौर मुख्यालय में पदस्थ सतर्कता अधिकारी संतोष परमार अपने कृत्यों से उनकी इस मंशा पर पानी फेर रहे हैं। परमार द्वारा बैंक में बैठकर फालतू वाट्सएप चलाकर टाईमपास किया जा रहा है जबकि उनके पास सैकड़ों प्रकरण कई वर्षों से लंबित हैं।
म.प्र. ग्रामीण बैंक एक्स स्टॉफ संगठन के महामंत्री बी.डी. तिवारी ने इस मामले में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के साथ ही रिजर्व बैंक को भी परमार की शिकायतें भेजी हैं जिनमें परमार द्वारा बैंक टाईम में क्रिकेट मैच एवं राजनीति पर आधारित वाट्सएप भेजने का प्रमाण भी भेजा गया है। ग्रामीण बैंक की स्थिति पहले ही काफी दयनीय है और सैकड़ों अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्कालीन प्रबंधन ने बिना किसी कारण के सेवा से बर्खास्त या निलंबित कर रखा है वहीं भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के अनेक मामले बैंक के सतर्कता विभाग के पास जांच के लिए लंबित पड़े हुए लेकिन सतर्कता अधिकारी संतोष परमार इन महत्वपूर्ण एवं गंभीर मामलों को ठंडे बस्ते में डालकर अपने वाट्सएप चलाने में ही मशगूल बने रहते हैं। हालांकि यह एक बहुत छोटा मामला है लेकिन इससे पता चलता है कि सतर्कता अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे परमार बैंक की दुर्दशा एवं लंबित पड़े मामलों के प्रति किस तरह उदासीनता बरत रहे हैं। बैंक के लगभग 150 कर्मचारियों के मामले अभी भी उच्च न्यायालय एवं अन्य अदालतों में लंबित पड़े हुए हैं।