बिलासपुर । हम यह समझते है कि हम उन चीजों के लिए जिम्मेदार है जो हम करते है और उसके लिए नहीं जो हम सोचते है। परंतु सत्य यह है कि हम सिर्फ उसके लिए ही जिम्मेदार है जो हम सोचते है, क्योंकि हम वहीं करते है जो हम सोचते है। जो हम कर रहे है वह हमारी पसंद है। जैसी हमारी सोच होती है वह हमारे बोल और कर्म से बाहर आती है। जिस प्रकार एक पेड़ होता है उसमें पत्ते, फल, फूल सब है लेकिन उस पौधे की क्वालिटि उसके बीज पर निर्भर होती है। अगर बीज गुलाब का है तो पौधा भी तो गुलाब का ही होगा। हम जिस प्रकार का विचार करते है हम वैसा ही बन जाते है। अगर हम किसी के लिए अच्छा सोचते है तो स्वत: ही हम उससे अच्छा बोलेंगे, अच्छा व्यवहार करेंगे। अगर हमने किसी के लिए गलत-गलत सोच लिया तो कोशिश करने के बाद भी ना चाहते हुए हमारे मुख से कोई ऐसी बात निकल जायेगी जिसका फिर नकारात्मक परिणाम सामने आता है। हमारे सकारात्मक विचारों का प्रभाव संबंधो पर भी पड़ता है और हमारे रिश्तों में सुधार होने लगता है। उक्त वक्तव्य प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यलाय की स्थानीय शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन संचालिका बी.के. स्वाति दीदी ने कही। 
स्वाति दीदी ने क्षमा दिवस के उपलक्ष्य में कहा कि जीवन में गलतियां होना स्वाभाविक है। भूल होना कोई गलत बात नहीं है लेकिन भूल को स्वीकार ना करना या क्षमा ना मांगना यह गलत है। आज व्यक्ति दूसरो की गलती बताने में देर नहीं करता पर अपनी गलती को छिपाता रहता है परंतु कोई किसी से कितना भी छिपा लें स्वयं से और परमात्मा से कोई भी बात छिप नहीं सकती। सत्यता की सबसे बड़ी निशानी है वह निर्भय होगा। सत्यता की शक्ति हमें बेफिकर, निश्चिंत और निर्भय बनाती है जिससे जीवन में खुशी बनी रहती है। जहां भय, चिंता है वहां खुशी नहीं रह सकती। कई बार मन में किसी के लिए नकारात्मक भाव होता है परंतु वह हम बाहर से शो नहीं करते परंतु मन में भारीपन होने के कारण मन में उलझन, उदासी और व्यर्थ संकल्प बहुत आते है। मन को हल्का और खुश रखने के लिए दिल से सबको माफ कर अपनी गलतियों के लिए भी सभी से क्षमा मांग लेना चाहिए।