नई दिल्ली: टीम इंडिया के पू्व दिग्गज बल्लेबाज चेतन चौहान (Chetan Chauhan) रविवार को अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं. चेतन के नाम वैसे तो एक अनोखा रिकॉर्ड है, लेकिन उन्हें भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर के पार्टनर के लिए ज्यादा जाना जाता है यह जोड़ी एक समय में टीम इंडिया का सफलतम जोड़ी मानी जाती थी. 1979 में दोनों ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले विकेट की साझेदारी का रिकॉर्ड बनाया. दोनों ने 213 रन की पार्टनरशिप की थी. इसमें से 80 रन चेतन चौहान ने बनाए थे. 

क्रिकेट से राजनीति का सफर
उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे चेतन चौहान 13 साल की उम्र में महाराष्ट्र चले गए थे. वे रणजी में महाराष्ट्र और दिल्ली की ओर खेले थे. क्रिकेट से रिटायर होने के बाद वे नॉर्थ जोन के चयन कर्ता और टीम इंडिया के दो बार मैनेजर भी रहे. जिस टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को कोलकाता में फॉलोऑन के बाद हराया था चौहान उसी टीम के मैनेजर थे. बाद में वे राजनीति में आ गए और बीजेपी के टिकट पर सांसद भी बने. फिलहाल वे उत्तर प्रदेश सरकार में खेल मंत्री हैं.


अपने डिफेंस से बनाया सबको कायल
चेतन ने 22 साल की उम्र में 1969 में न्यूजीलैंड के साथ अपना टेस्ट करियर शुरू किया था. उनकी बल्लेबाजी तकनीक में कुछ खामियां तो मानी जाती थीं, लेकिन उनके क्रीज पर टीके रहने के जब्जे के सब कायल थे. उनकी डिफेंस तकनीक इतनी मजबूत थी कि उन्हें आउट करना बहुत ही मुश्किल माना जाता था. डेब्यू टेस्ट में उन्हें अपना खाता खोलने में 25 मिनट लगे थे. उसके बाद उन्होंने लगातार दो चौके जड़कर अपना खाता खोला. मजेदार संयोग यह है कि उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था. 

ऐसा रहा चेतन का करियर
चेतन चौहान ने अपने करियर में 40 टेस्ट और सात वनडे मैच खेले थे. टेस्ट की 68 पारियों में उन्होंने 31.57 के औसत और 16 हाफ सेंचुरी के साथ 2084 रन बनाए थे. वहीं 7 वनडे में वे केवल 153 रन बना सके थे. उनका फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड शानदार रहा था जिसमें उन्होंने 179 मैचों की 299 पारियों में 4022 के औसत से कुल 11143 रन बनाए थे जिसमें 21 सेंचुरी और 59 हाफ सेंचुरी शामिल हैं. 

क्या है चेतन का वह इकलौता रिकॉर्ड
चेतन दुनिया के पहले ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने अपने 2000 टेस्ट रन बना सेंचुरी लगाए बनाए. इन 2000 रनों में 16 हाफ सेंचुरी भी शामिल हैं. यह रिकॉर्ड सालों तक बना रहा, लेकिन बाद में शेन वार्न ने इस रिकॉर्ड की बराबरी की. लेकिन वार्न के इस रिकॉर्ड और चौहान के रिकॉर्ड में एक अंतर है. वार्न ओपनर नहीं थे. वे एक टेलएंडर थे. वे पहले पांच विकेट गिरने से पहले शायह ही कभी बैटिंग करने आए. वहीं चौहान सलामी बल्लेबाज थे. वे विदेशों में टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत देते थे जहां टीम की जरूरत रहती थी कि ओपनर ज्यादा देर तक टिके रहें.