भोपाल। प्रदेश में एक बार फिर प्रदेश सरकार और उसके स्वास्थ्य महकमे ने अपनी लापरवाही के चलते 4 रोगियों की आंखों की रोशनी छीन ली। पहले इंदौर और अब मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में डॉक्टरों ने जिस तरह की लापरवाही को दोहराया है, उससे जाहिर है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और मरीजों की जिंदगी को नर्क बनाने वाले डॉक्टरों, कर्मचारियों पर सरकार का किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री राकेशसिंह ने छिंदवाड़ा में मोतियाबिंद के रोगियों को एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने से उनकी रोशनी चली जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। 

                श्री राकेश सिंह ने छिंदवाड़ा की घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण योजना को कितनी गंभीरता से लेती है। साथ ही इससे यह भी स्पष्ट है कि सरकार और उसके स्वास्थ्य महकमे ने इंदौर की घटना से कोई सबक नहीं सीखा। उन्होंने कहा कि पहले इंदौर और अब छिंदवाड़ा की घटना ने स्वास्थ्य महकमे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिन रोगियों की आंखों रोशनी गई है, उनमें से ज्यादातर गरीब परिवारों के हैं। आंखें खराब हो जाने के बाद अब उनके सामने रोजी रोटी और जीवनयापन की समस्या खड़ी हो जाएगी। ऐसे में सरकार का यह दायित्व है कि वह सभी रोगियों को उचित मुआवजा दे, ताकि वे अपनी जिंदगी गुजार सकें। श्री सिंह ने कहा कि सरकार ने इस मामले की जांच की घोषणा की है, जो पर्याप्त नहीं है। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जरूरत होती है और यदि सरकार ने इंदौर के मामले में ऐसे कदम उठाए होते, तो इस तरह की लापरवाही करने की स्वास्थ्य विभाग का अमला नहीं कर पाता। प्रदेश अध्यक्ष श्री राकेश सिंह ने इस घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।