बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (एचएएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने शुक्रवार को एलान किया कि उनकी पार्टी महागठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए बिहार में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।  
मांझी ने कहा कि हम झारखंड विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन में शामिल हुए अकेले ही लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि महागठबंधन (बिहार) में हमें नजरअंदाज किया गया इसलिए हमने 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव भी निर्दलीय लड़ने का फैसला किया है।

मांझी ने कहा कि महागठबंधन से अलग होने का फैसला सिर्फ हमारा नहीं है। हमने गुरुवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ एक बैठक की जिसके बाद हम इस निर्णय पर पहुंचे कि हमारा महागठबंधन से अलग होना ही ठीक रहेगा।

उन्होंने कहा कि महागठबंधन में रहने के दौरान हमने समन्वय समिति बनाने की मांग की थी जिसपर किसी के भी तरफ से ध्यान नहीं दिया गया। समन्वय समिति के नहीं होने के कारण कोई निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया जा रहा है।
भाजपा में शामिल होने की अटकलें
इसी बीच ताजा घटनाक्रम को देखते हुए भाजपा के  साथ जाने की अटकलें लगाई जा रही है। बताया जा रहा है कि महागठबंधन से अलग होने की मांझी की घोषणा के बाद से ही उनका भाजपा के नेताओं से मिलने-जुलने का सिलसिला बढ़ गया है।

भाजपा के एमएलसी संजय पासवान ने मांझी से गुरुवार को मुलाकात की थी। इसके बाद शुक्रवार को भाजपा विधायक रामप्रीत पासवान भी मांझी से मिलने पहुंचे। हालांकि इस दौरान दोनों के बीच क्या बातें हुईं इसको लेकर कुछ खुलासा नहीं हुआ है।

भाजपा नेताओं से मुलाकात को लेकर मांझी ने सफाई देते हुए कहा कि इसमें कोई राजनीतिक बात नहीं है। ये लोग निजी कारणों से मुझसे मिलने आए थे और बता दूं कि मैं एनडीए में शामिल नहीं हो रहा हूं।

झारखंड में घोषणा 10 को
पूर्व सीएम ने कहा कि झारखंड विधानसभा का चुनाव पार्टी अकेले लड़ेगी। पार्टी किन-कन सीटों पर चुनाव लड़ेगी इसकी घोषणा 10 नवंबर को की जाएगी। पार्टी ने झारखंड चुनाव की जिम्मेवारी में राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संतोष कुमार सुमन को सौंपी है।