रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्थापित किये गए पे-प्वाइंट बैंक सखी सेे ग्रामीणों को अब अपने गांव और घर के पास ही सुविधाएं मिलने लगी है। संचालित बैंकों की सेवाएं ग्रामीणों के घर तक पहुंच गई है। केवल खाता खोलने को छोड़कर बाकी लेन-देन के सभी कार्य बीसी सखी बड़ी सुगमता से कर रहीं है। बीसी (बिजनेस करेसपॉन्डेंस) सखी के द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न पेंशन योजनाओं में जुड़े ग्रामीण क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक सीधे लाभान्वित हो रहे है। इन्हें अपने घर से दूर बैंक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रहीं है। कबीरधाम जिले में 92 बीसी सखी अपनी सेवाएं दे रही हैं जो जिले के विभिन्न बैंको से जुड़कर ग्रामीणों को सुविधाएं दे रही हैं। जिले की सभी 461 ग्राम पंचायतों में सुविधाओं का विस्तार हो चुका है। प्रत्येक 5 ग्राम पंचायत पर एक बीसी सखी अपनी सेवाएं दे रही है।
जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजय दयाराम के. बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बनाये गए स्व.सहायता समूह की महिला सदस्य के द्वारा बीसी सखी का कार्य किया जा रहा है। बीसी सखी को जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर बैंकों से एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों के द्वारा पूर्ण रूप से प्रशिक्षण दिया गया है। एन.आर.एल.एम.योजना के द्वारा सभी बीसी सखी को फिंगर पिं्रट स्कैनर (बायोमैट्रिक डीवाइस) उपलब्ध कराया गया है। इसकी सहायता से बीसी सखी अपने बैंकिंग क्षेत्र के पेंशन हितग्राहियों का अंगूठा स्कैन कर पेंशन की राशि वरिष्ट नागरिकों को उनके घर में ही दे रही है। इस सुविधा से ग्रामीणों को शहर तक आने की जरूरत नहीं तथा आने जाने में होने वाला व्यय एवं उस दिन का काम छोड़ने से होने वाला नुकसान भी रूक गया है।  
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से समूह की महिलाओं को इस कार्य के लिए कमीशन के रूप में प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मैदान से लेकर दुर्गम जंगलों तक मिलने वाली इस सुविधा से ग्रामीणों में बहुत उत्साह है, क्योंकि वृद्धा अवस्था पेंशन हो या सामाजिक सुरक्षा पेंशन अथावा महात्मा गंाधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का मजदूरी भुगतान गांव में ही सहजता से ग्रामीणों को मिल रहा है। ज्ञात हो कि राज्य शासन द्वारा निरन्तर प्रयास किया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करते हुए रोजगार के अवसर के साथ आजीविका संर्वधन किया जाए। इसका ही परिणाम है कि विगत दो माह में बीसी सखी के लिए महिलाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित कर तैयार किया गया जिसका परिणाम है की आज वे घर-घर जाकर ग्रामीणों को शासकीय योजना से लाभान्वित कर रही है। जनपद पंचायत कवर्धा में 20, जनपद पंचायत बोड़ला में 25, जनपद पंचायत स.लोहारा में 18 एवं जनपद पंचायत पण्डरिया में 29 बीसी सखी के काम से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर हो गयी है जो बैंको की लेन-देन में सीधे जुड़कर ग्रामीणों को लाभ पहुंचा रही है।