फिल्म एक ऐसे मुद्दे के साथ जुड़ी हुई है जो हर किसी से जुड़ा हुआ है ऐसे में कलाकार क्या वह संदेश अपने काम से पहुंचा पा रहा है? इस मामले में कियारा आडवाणी ने 10 में से 10 अंक प्राप्त किए हैं क्योंकि अगर फिल्म में कुछ एक ऐसी चीज है जिसे आप बिना पलक झपके देखना चाहे वह कियारा आडवाणी की एक्टिंग है.

साल 2019 में जिस एक मुद्दे ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था वह मुद्दा था मी टू. जब सार्वजनिक क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं ने उनके खिलाफ दफ्तर, घर या किसी अन्य जगह हुए शोषण को उजागर किया था. और दुनिया के सामने अपने किस्से साझा किए थे, हिंदुस्तान में भी मी टू का बड़ा अभियान चला था. अब 1 साल के बाद नेटफ्लिक्स और करण जोहर मिलकर एक फिल्म लाए हैं Guilty, जो इस MeToo के मुद्दे के आसपास बनी है. फिल्म की काफी चर्चा है ऐसे में कैसी है यह फिल्म नजर डालें...

कहानी क्या है???

दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी है, जिसमें अमीरज़ादों के बच्चे पढ़ते हैं. इन्हीं बच्चों में से 4-5 स्टूडेंट्स का एक ग्रुप है जिनका एक म्यूजिक बैंड है. इनमें एक लड़की है जिसका नाम है नानकी दत्ता (कियारा आडवाणी). रंग-बिरंगे बाल, बिल्कुल 21वीं सदी की एक लड़की...उसका एक बॉयफ्रेंड है और उसके कुछ अच्छे दोस्त हैं.

इन्हीं दोस्तों के बीच एक जूनियर की एंट्री होती है जिसका नाम है तनु कुमार. वह एक छोटे शहर से आई है लेकिन उसके ख्वाब बड़े हैं. वह भी अमीर स्टूडेंट्स के साथ उठना बैठना चाहती है, यूनिवर्सिटी में अपनी एक पहचान बनाना चाहती है. इसी दौरान जब उसकी मुलाकात इस म्यूजिक बैंड के साथ होती है तब उसका दिल नानकी के बॉयफ्रेंड पर आ जाता है.

यूनिवर्सिटी में फेस्टिवल के दौरान उसका रेप किया जाता है तनु कुमार उसका खुलासा करती है और उसके बाद किस तरह लोग इस बात को टालने की कोशिश करते हैं या बचाने की कोशिश करते हैं फिल्म इसी के इर्द-गिर्द घूमती है.

कितना दम है?

जिस मुद्दे पर फिल्म बनाई गई है वह काफी दमदार है और दुनिया के एक बड़े तबके की भावनाएं उसके साथ जुड़ी हैं. ऐसे में यह फिल्म बहुत ही महत्वपूर्ण है और आज की पीढ़ी के साथ रिलेट भी करती है. लेकिन फिल्म की यही खासियत कई बार इसके लिए नुकसानदेह साबित होती है. क्योंकि कई बार यह फिल्म बीच-बीच में रियल्टी से अलग हटके भी दिखाई देती है.

उदाहरण के तौर पर दिल्ली की एक ऐसी यूनिवर्सिटी जहां पर स्टूडेंट्स अधिकतर ड्रग्स लेते रहते हैं, सिगरेट पीते रहते हैं, शराब पीते रहते हैं. हालांकि यह फिल्म है वह हर किसी को समझ में आता है. लेकिन यह सिर्फ एक नाकाम कोशिश लगती है करण जोहर की यूथ से जुड़ने के लिए क्योंकि करण जोहर की अगर दूसरी फिल्मों को उठाकर देखें तो उसमें जिस तरह के कॉलेज, स्कूल या घर दिखाई देते हैं वह एक चिन्हित ऑडियंस को टारगेट करते हैं इसी तरह नेटफ्लिक्स के साथ करण जोहर यूथ को टारगेट करना चाह रहे हैं लेकिन यहां पर भी उनका वह पॅाश वाला अंदाज अलग नहीं दिखा.

फिल्म को यूथ ओरिइनटेड बनाने के चक्कर में कई बार बीच-बीच में यह अपने मुख्य मुद्दे से भटकती हुई दिखती है, जो दर्शक महसूस भी कर पाते हैं. ऐसे में आपको कई बार पिंक या फिर आर्टिकल 375 जैसी फिल्में याद आती है, जहां भी इस तरह का कुछ एक मुद्दा उठा था. लेकिन गिल्टी में वह फील नहीं आ पाता है जो सामाजिक मुद्दे का एक मैसेज दे पाए, हालांकि आखिरी का कुछ ऐसा आपको कुछ सोचने पर मजबूर जरूर करता है.

कियारा आडवाणी का सबसे बेहतरीन काम?

फिल्म एक ऐसे मुद्दे के साथ जुड़ी हुई है जो हर किसी से जुड़ा हुआ है ऐसे में कलाकार क्या वह संदेश अपने काम से पहुंचा पा रहा है? इस मामले में कियारा आडवाणी ने 10 में से 10 अंक प्राप्त किए हैं क्योंकि अगर फिल्म में कुछ एक ऐसी चीज है जिसे आप बिना पलक झपके देखना चाहे वह कियारा आडवाणी की एक्टिंग है. साउथ दिल्ली की 21वीं सदी की एक लड़की का किरदार जिस तरह उन्होंने निभाया है और कुछ सीन उन्होंने ऐसे किए हैं जो आपको सांसे थामने के लिए मजबूर कर देंगे.

इससे पहले भी नेटफ्लिक्स की ही लस्ट स्टोरीज़ में कियारा आडवाणी के शानदार काम की तारीफ हुई थी. ऐसे में अगर कोई एक कारण भी आप इस फिल्म को देखने के लिए ढूंढ रहे हो तो वह कियारा आडवाणी हैं. हालांकि उनके अलावा डेब्यू कर रही आकांक्षा रंजन कपूर ने भी अपने किरदार को काफी सही तरीके से निभाया है, साथ ही एक वकील की भूमिका निभा रहे ताहिर शब्बीर ने भी शानदार अभिनय किया है और वह जिस किरदार को निभा रहे हैं वह उसमें पूरी जान भी पूछते हैं.