इस्लामाबाद। वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहे पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना के बीच मतभेद गहरा गए हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना ने इमरान खान के पापों को अपने सिर पर उठाने से मना कर दिया है। देश की स्थिति सुधारने के लिए इमरान खान को जून तक का वक्त दिया गया है।
करीब 22 करोड़ की आबादी वाला पाकिस्तान भी इस महामारी से जूझ रहा है। देश में अब तक 4541 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं और 65 लोगों की मौत हो गई है। पाकिस्तान में हालात को संभालने के लिए कई जगहों पर लॉकडाउन कर दिया गया है। पाकिस्तान में जैसे-जैसे कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है, इमरान खान सरकार विवादों में आती जा रही है। इमरान खान सरकार पर चीन और ईरान में हुई मौतों से न सीखने का आरोप लग रहा है। अब तक कोरोना संकट को बेहद हल्के अंदाज में ले रहे इमरान खान पर निर्णायक एक्शन लेने का दबाव बनता जा रहा है।
पाकिस्तान में विपक्ष के शासन वाले सिंध प्रांत में इमरान खान सरकार ईरान से आने वाले तीर्थयात्रियों की जांच करने और उन्हें क्वारंटाइन करने में बुरी तरह से असफल रही। नतीजा यह रहा है कि सिंध में कोरोना बहुत तेजी से फैल गया। सेना का यह ऐलान इस बात का स्पष्ट संदेश था कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को लेकर सेना का सब्र टूट रहा है। सेना को लग रहा है कि संकट की इस घड़ी में जब देश को सबसे ज्यादा जरूरत है तब इमरान खान सही से कप्तानी नहीं कर पा रहे हैं। यही नहीं कई टीवी चैनलों ने पीएम इमरान खान का जमकर मजाक उड़ाया था।
इमरान की इस अक्षमता के बाद खुद सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को 1 अप्रैल को केंद्र और प्रांतों की सरकारों के साथ बैठक करनी पड़ी। इससे इमरान खान सरकार की भौहें चढ़ गईं। अब इस पूरे महामारी को रोकने की कमान सेना के एक अधिकारी जनरल हमूद खान को दे दी गई है। माना जा रहा है कि इस महामारी के खात्मे के बाद इमरान खान सरकार का जाना तय हो सकता है। बताया जा रहा है कि सेना ने विपक्षी नेताओं से इमरान को हटाने को लेकर संपर्क करना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान के मशहूर ऊर्दू पत्रकार सुहैल वरैच का कहना है कि इमरान खान के पास मात्र जून तक का समय है। अगर इमरान खान अपने प्रशासन को एकजुट करने और विपक्ष के साथ मतभेद को दूर करने में असफल रहते हैं तो देश में हिंसात्मक राजनीतिक बदलाव होगा। माना जा रहा है कि सेना ने इमरान को 3 महीने का समय दिया है। अगर इमरान खान की सत्ता जाती है तो वह एक और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री होंगे जो अपना कार्यकाल नहीं पूरा कर पाए।