कब्रिस्तान में दादा-दादी के बगल दफनाया गया असद, नाना-मौसा ने निभाए रिवाज

 प्रयागराज

अतीक अहमद के बेटे असद और शूटर गुलाम का गुरुवार की दोपहर यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया. एसटीएफ की झांसी के पारीछा डैम के पास असद और गुलाम से मुठभेड़ हुई, जिसमें दोनों मारे गए. उमेश पाल मर्डर केस में ही दोनों वांछित अपराधी थे, जिनके ऊपर यूपी पुलिस ने 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था. उमेश पाल 2005 में हुए राजू पाल मर्डर केस के मुख्य गवाह थे. उमेश पाल की 24 फरवरी को प्रयागराज में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी.

माना जा रहा है कि असद के शव को देखने के लिए अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पहुंच सकती हैं. ऐसे में उसके सरेंडर की भी चर्चा है. शाइस्ता पर 50 हजार का इनाम है. शाइस्ता वेश बदलकर जनाजे में शामिल हो सकती है. पुलिस ने शाइस्ता की गिरफ्तारी के लिए तैयारी कर ली है. उस पर नजर रखने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को सादा वर्दी में तैनात करने की तैयारी है. उधर, अतीक अहमद ने पुलिस को दिए बयान में मान लिया है कि उसने ही जेल से उमेश पाल के हत्याकांड की साजिश रची थी.  

असद के जनाजे में शामिल हुए 20-25 लोग

प्रयागराज के एसीपी आकाश कुलहरि ने बताया कि असद के परिवार के 20-25 करीबी लोग उसके सुपुर्द-ए-खाक में शामिल हुए. गुलाम के शव को अंतिम संस्कार के लिए दूसरे कब्रिस्तान में ले जाया गया है. असद के नाना यहां हैं और वो असद के सुपुर्द-ए-खाक की रिवाज उन्होंने ही निभाई. अतीक के पड़ोसी शमीम ने कहा कि अतीक और शाइस्ता को यहां होना चाहिए था, ये गलत हुआ है.

कसारी-मसारी में दफनाया गया असद

अतीक के बेटे असद को पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफना दिया गया है. असद के सुपुर्द-ए-खाक में पुलिस ने असद के 35 करीबी रिश्तेदारों को शामिल होने दिया, जिनमें नाना और मौसा शामिल हैं. असद की मां शाइस्ता परवीन भी उसे देखने नहीं पहुंच पाई और अतीक ने भी असद के जनाजे में शामिल होने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी और उस पर आज ही सुनवाई होनी थी.

दिन दहाड़े किसी के भी मौत की तारीख लिखने वाला यह खूंखार अपराधी इस समय कानून की बेड़ियों में इस कदर जकड़ा है अब केवल जार जार आंसू ही बहा सकता है. बेटे के जनाजे में शामिल होने के लिए अतीक अहमद ने शुक्रवार को ही कोर्ट में अर्जी लगाई थी. उसने अदालत से गुहार किया था कि उसके निर्दोष बेटे को पुलिस ने मार दिया और अब उसके जनाजे में शामिल नहीं होने दिया जा रहा है. यह अर्जी आंबेडकर जयंती की छुट्टी होने की वजह से रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दाखिल हुई थी.

लेकिन कोर्ट ने इसे क्षेत्राधिकार से बाहर की बात कहते हुए रिजेक्ट कर दी. ऐसे में आज अतीक अहमद नए सिरे से सीजेएम कोर्ट में अर्जी लगाने वाला था. लेकिन कोर्ट खुलने से पहले ही असद को दफन कर दिया गया. इस संबंध में अतीक के वकीलों ने बताया कि कोर्ट खुलने पर ही अतीक की अर्जी दाखिल होती और जब तक उसपर सुनवाई होती, काफी देर हो सकती थी. उधर, गर्मी अधिक होने की वजह से पोस्टमार्टम के बाद असद का शव तेजी से खराब होने लगा था.

ऐसे में दफन कार्यक्रम को रोकना ठीक नहीं था. इसलिए परिजनों को बता दिया गया था कि वह दफन में अतीक के आने का इंतजार ना करें. अतीक अहमद के वकीलों के मुताबिक, यह सब अतीक की सहमति से किया गया है. बता दें कि 13 मार्च को एसटीएफ ने उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रहे अतीक अहमद के बेटे असद का झांसी में एनकाउंटर किया था. असद के साथ पुलिस ने अतीक के खास शूटर गुलाम को भी मार गिराया था.

इसकी सूचना समय से अतीक और उसके परिजनों को दे भी दी गई. बावजूद इसके पोस्टमार्टम के वक्त ना तो असद का कोई परिजन पहुंचा और ना ही शूटर गुलाम के ही घर से कोई आया. हालांकि शुक्रवार की देर शाम असद के फूफा ने झांसी पहुंच कर शव रिसीव किया. इसके बाद दोनों शवों को प्रयागराज लाकर दफन किया गया है.

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